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केडी जाधव के बेटे ने जताई नाराजगी, कहा-एकता कपूर को पद्म श्री फिर मेरे पिता को क्यों नहीं

नई दिल्ली. दिग्गज पहलवान केडी जाधव (KD Jadhav) के बेटे रंजीत जाधव (Ranjit Jadhav) ने बुधवार को अपने दिवंगत पिता को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ देने की मांग की.


 


रंजीत ने कहा कि उनके पिता ओलिंपिक (हेलसिंकी, 1952) में व्यक्तिगत पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी थे लेकिन उन्हें पद्म पुरस्कार तक नहीं मिला जबकि टीवी निर्माता एकता कपूर (Ekta Kapoor) को यह पुरस्कार मिला है. जाधव का 1984 में निधन हुआ. रंजीत ने महाराष्ट्र के सातारा जिले के अपने परिवार के पैतृक गांव से पीटीआई को बताया कि उनके पिता को अर्जुन पुरस्कार भी 2001 में दिया गया.


के डी जाधव के बेटे ने उठाए सवाल


उन्होंने कहा, ‘पिछले 19 साल से मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रहा हूं कि सुनिश्चित कर सकूं कि मेरे पिता को भारत रत्न मिले या फिर कम से कम मरणोपरांत पद्म पुरस्कार मिले. मेरे पिता का 1984 में निधन हुआ और उन्हें 17 साल बाद अर्जुन पुरस्कार मिला.’


रंजीत ने दावा किया, ‘‘मेरे पिता ने 1952 में ओलंपिक पदक जीता. अगर आप 1954 से 1984 के पुरस्कार विजेताओं की सूची देखो तो कई खिलाड़ियों को पद्म श्री मिला और कुछ को तो पद्म भूषण भी मिला जबकि कुछ को तीनों मिले (पदक विभूषण भी). हालांकि महान हाकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद और कुछ अन्य हाकी खिलाड़ियों को छोड़कर उनमें से कोई भी ओलिंपियन नहीं था.’ उन्होंने कहा, ‘एकता कपूर को इस साल पद्म श्री दिया गया. उन्हें पुरस्कार देने का सामाजिक अर्थ क्या है?’


भारत को 1952 के हेलसिंकी ओलिंपिक में केडी जाधव ने जीता था मेडल


महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव गोलेश्वर में केडी जाधव (KD Jadhav) रहते थे . वे बचपन से ही खेलों में काफ़ी रुचि रखते थे. भारत को आज़ादी मिलने के बाद पहला ओलिंपिक लंदन में 1948 में हुआ था. जिसमें जाधव को निराशा ही हाथ लगी. 1952 के हेलसिंकी ओलिंपिक में उन्होंने फ़्री स्टाइल कुश्ती में तीसरा स्थान हासिल किया. 14 अगस्त 1984 को एक सड़क दुर्घटना में उनकी मौत हो गई. पहलवान केडी जाधव (KD Jadhav) ने 1952 ओलिंपिक में बेंटमवेट स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीता था.


इसके 3 साल बाद 1955 में केडी जाधव  (KD Jadhav) बतौर सब-इंस्पेक्टर पुलिस में भर्ती हुए और उन्होंने कई मेडल जीते. 27 साल तक नौकरी करने के बाद जाधव सहायक पुलिस कमिश्नर के पद पर रिटायर हुए लेकिन 1984 में सड़क हादसे में उनकी मौत के बाद जाधव की पत्नी को पेंशन के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ी.


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