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मत्स्य पालन को बढ़ावा देने मत्स्य विभाग द्वारा चलाई जा रही अनेक योजनाएं

देश मे मछली की मांग और खपत को दृष्टिगत रखते हुए मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं। मत्स्य पालन के लिए हितग्राहियों को मत्स्य विभाग द्वारा इसके लिए प्रशिक्षण भी दिया जाता है। पांच दिवसीय प्रशिक्षण तथा 2 दिनों का अध्ययन भ्रमण भी कराया जाता है---


इस योजना में सभी श्रेणी के मछुआरों को मत्स्य पालन की तकनीक मछली पकड़ने, जाल बुनने, सुधारने तथा नाव चलाने का प्रशिक्षण दिया जाता है।
    इसके लिए हितग्राहियों का चयन जनपद तथा जिला पंचायत की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा किया जाता है। प्रत्येक हितग्राही को प्रशिक्षण केंद्र तक आने जाने का किराया तथा 150 रूपये प्रतिदिन शिक्षण वृत्ति प्रदान की जाती है। मछुआ सहकारिता योजना में मत्स्य विभाग द्वारा सभी वर्ग के पंजीकृत मछुआ सहकारी समितियों को मछली पालन के लिए उपकरण एवं तालाब की पट्टा राशि मत्स्य बीज क्रय, नाव-जाल क्रय करने के लिए एक लाख पचास हजार रुपये का अनुदान दिया जाता है। इसी प्रकार मत्स्य पालन प्रसार योजना में राज्य के सभी वर्ग के मत्स्य पालकों को लंबी अवधि तक तालाब पट्टे पर लेकर मत्स्य पालन करने पर 15 हजार रूपये तक अनुदान सहायता राशि दी जाती है।
    इसके साथ ही मछुआ क्रेडिट कार्ड योजना में मछुआरों को मत्स्य पालन एवं मत्स्याखेट के लिए आवश्यक उपकरण क्रय करने के लिए क्रियाशील पूंजी सहकारी बैंकों के माध्यम से किसान क्रेडिट कार्ड के द्वारा मत्स्य कृषकों को अल्पावधि ऋण शून्य प्रतिशत ब्याज पर उपलब्ध कराया जाता है। इसमें ग्रामीण तालाबों में मछली पालन के लिए 18 हजार 300  रूपये प्रति हैक्टर 18 माह के लिए, सिंचाई तालाबों में मत्स्य पालन के लिए दो हजार रूपये प्रति हैक्टर 18 माह के लिए तथा मौसमी तालाबों में स्थान संवर्धन के लिए 23 हजार प्रति 0.25  हैक्टर 6 माह के लिए उपलब्ध कराया जाता है।
    इसी प्रकार मत्स्य आहार प्रबंधन योजना में ग्रामीण तालाबों की मत्स्य उत्पादकता 2500 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर वृद्धि हेतु फार्मुलेटेड फ्लोटिंग या नॉन फ्लोटिंग फीड (परिपूरक मत्स्य आहार) के उपयोग एवं महत्व से अवगत कराए जाने के उदेश्य से योजना लागू है। इस योजना में इकाई लागत का 10 प्रतिशत अर्थात पॉच हजार रूपये प्रति हैक्टर की दर से हितग्राहियों द्वारा बैंक ड्राफ्ट के रूप में एमपी एग्रो में जमा कराया जाता है। हितग्राहियों को वित्तीय सहायता के रूप में इकाई लागत का 90 प्रतिशत अर्थात 45 हजार रूपये प्रति हैक्टर की दर से अनुदान केवल एक बार देय होता है।


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