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पशुपालकों को पशुओं की चमड़ी पर गांठनुमा रोग का उपचार कराने की सलाह - छिन्दवाड़ा

जिले के पशुपालकों को सलाह दी गई है कि वे अपने पशुओं की चमड़ी पर गांठनुमा रोग लम्पी स्किन डिसीज दिखाई देने पर तत्काल पशु चिकित्सक को सूचना देकर इस रोग का उपचार करायें ताकि यह बीमारी दूसरे पशुओं में नहीं फैले । यह बीमारी एक सप्ताह में स्वत: ठीक हो जाती है ।
      उप संचालक पशु चिकित्सा सेवायें डॉ.एच.जी.एस.पक्षवार ने बताया कि केप्री पाक्स वायरस से लम्पी स्किन डिसीज होती है जो मच्छर, मक्खी व किलनी-कथीरी के काटने से फैलती है । यह एक संक्रामक बीमारी है जो एक पशु से दूसरे पशु में फैलती है । इस बीमारी से बीमार पशुओं में बुखार आने के कारण दुग्ध उत्पादन में कमी आ जाती है । इस बीमारी में पशुओं के शरीर में चमड़ी के ऊपर गोल उभरी हुई गठान दिखाई देती है  जो चमड़ी के साथ-साथ मसल्स की गहराई तक जाती है । इस बीमारी के लक्षण मुंह, गले व श्वास नली तक फैलते है और लिंफ नोड में सूजन, पैरों में सूजन, गर्भपात, बांझपन आदि लक्षण भी दिखाई देते हैं। यह बीमारी संक्रामक होने के कारण लगभग 30 से 50 प्रतिशत तक पशुओं में फैलने की संभावना बनी रहती है । उन्होंने इस बीमारी की रोकथाम के लिये सलाह दी है कि जिस पशु में इस बीमारी के लक्षण दिखाई दें, उसे स्वस्थ पशु से अलग रखें । पशुओं को बांधने वाली जगह (गौ-शाला) और आस-पास की जगह मच्छर, मक्खी व किलनी-कथीरी मारने वाली दवा का छिड़काव करें । पशुओं के कोठे में धुंआ करें और साफ-सफाई रखें । पशु चिकित्सक से इलाज करायें और दवाईयां लें । अपने पशुओं को बाहर नहीं छोड़े और बारिश से बचायें । उन्होंने सलाह दी है कि पशुपालक पशुओं की इस बीमारी से परेशान नहीं हों, बल्कि पशु चिकित्सा सेवायें विभाग की सेवायें प्राप्त कर अपने पशुओं को स्वस्थ रखें


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