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राष्ट्रभाषा हिन्दी को बढ़ावा देने से ही देश का विकास संभव है- उच्च शिक्षा मंत्री

हिन्दी को सम्मान दिलाने के लिये हम सब मिलकर प्रयास करें- किसान कल्याण मंत्री
मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी में आयोजित हुआ स्वागत कार्यक्रम
 


किसी भी देश की पहचान उस देश की राष्ट्रभाषा से होती है। विश्व के कई देश अपनी राष्ट्रभाषा के माध्यम से ही आगे बढ़ रहे हैं। इसी तरह हमें अपने देश के विकास के लिये राष्ट्रभाषा हिन्दी को बढ़ावा देना आवश्यक है। यह बात प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी में नव नियुक्त संचालक श्री अशोक कड़ैल के स्वागत कार्यक्रम में कही। कार्यक्रम में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री कमल पटेल शामिल हुए।


उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी के नये संचालक श्री कड़ैल को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा अपना जीवन शिक्षा और समाजहित में लगाया है। मंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नई शिक्षा नीति राष्ट्रभाषा हिन्दी को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। विभिन्न पाठ्यक्रमों की पुस्तकें हिन्दी में भी अनुवाद कराई जा रही हैं। नई शिक्षा नीति में अन्य भारतीय भाषाओं का भी ध्यान रखा गया है।


किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री कमल पटेल ने कहा कि राष्ट्र और संस्कृति के लिये कार्य करने वालों का जीवन सार्थक होता है। श्री कड़ैल संघर्षशील, परिश्रमी और योग्य अधिकारी हैं जो हमेशा अपने राष्ट्र और संस्कृति के लिये समर्पित रहते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रभाषा हिन्दी को सम्मान दिलाने के लिये हम सबको मिलकर प्रयास करना होगा। हिन्दी को मान सम्मान दिलाने की कोशिश होगी तो राष्ट्र का सम्मान बढ़ेगा। स्वाभिमान, चरित्र, पुरूषार्थ और देशभक्ति हिन्दी से ही संभव है। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग के कार्यों में हिन्दी का ही उपयोग किया जा रहा है।


कार्यक्रम में पूर्व संचालक मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी श्री चंन्द्रशेखर वालिम्बे एवं नवनियुक्त संचालक श्री अशोक कड़ैल ने भी अपने विचार व्यक्त किये।


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