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समन्वित खेती से गेंदा बाई की जिदंगी में आई खुशहाली "कहानी सच्ची है"

     समन्वित खेती का तौर-तरीका लघु एवं सीमांत किसानों के लिये वरदान बन गया है। एक उद्यम की दूसरे उद्यम पर अंर्तनिर्भरता समन्वित कृषि प्रणाली की खूबी है। इस पद्धति से किसान कम लागत में अधिक फसलोत्पादन लेकर अधिक आय अर्जित कर रहे हैं।
    ऐसी ही एक दास्ताँ है जबलपुर जिले के विकासखण्ड कुण्डम के ग्राम बटई की महिला कृषक गेंदा बाई का। गेंदा बाई बताती हैं कि कोरोना महामारी की वजह से लगे लॉकडाउन के दौरान गांव में साग-सब्जी की कमी महसूस होने लगी थी। साथ ही परिवार भी आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। ऐसे में परम्परागत फसल उत्पादन के साथ ही मैने सब्जी एवं फलों का उत्पादन कार्य शुरू किया। कृषि विभाग की आत्मा परियोजना की मदद से मैने अपने ढ़ाई एकड़ की कृषि भूमि पर भिण्डी, भटा, पपीता, लौकी और हल्दी का उत्पादन प्रारंभ किया। कृषि में रूचि रखने वाले गांव की महिलाओं का स्व-सहायता समूह बनाया। परिवार के सदस्यों की मदद और कृषि विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन में मैने समन्वित पद्धति से फल व सब्जी की खेती को शुरू किया। सब्जियों की मात्रा एवं गुणवत्ता अच्छी होने से बाजार तक पहुँचाने की व्यवस्था की। बाजार में ताजी सब्जी का अच्छा भाव मिलने लगा और हमें करीब दस हजार रूपये प्रतिमाह की आमदनी होने लगी।


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