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बाँस मिशन से मिल रहा है लोगों को रोजगार

 राज्य बाँस मिशन द्वारा बालाघाट जिले के आदिवासी बहुल बैहर परिक्षेत्र में संचालित सामान्य सुविधा केन्द्र के माध्यम से लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। बाँस शिल्पी राजू बंजारा अपने समूह के साथ जुड़े कर लाभ कमा रहे हैं, वहीं अन्य बाँस शिल्पियों और आदिवासियों को प्रशिक्षित कर उनकी आर्थिक समृद्धि में अहम भूमिका भी निभा रहे हैं। इन शिल्पियों द्वारा निर्मित उत्पादों का विक्रय प्रदेश के साथ ही देश भर में हो रहा है।

बैहर में सामान्य सुविधा केन्द्र (सीएफसी) की स्थापना 30 साल पहले कुटीर उद्योग के रूप में हुई थी। तब सूमघार रस्सी और बाँस कोशा बाड़ी के लिये बाँस की चटाई बनाई जाती थी। इसके लिये उपयुक्त घास की कमी के कारण इसे वर्ष 1995-96 में बंद करना पड़ा।

वन विभाग एवं राज्य बाँस मिशन द्वारा पाँच साल पहले 2016 में इस उद्योग को पुन: नया स्वरूप देकर चालू कराया गया। इस सामान्य सुविधा केन्द्र में बाँस आधारित मशीनें उपलब्ध हैं। यहाँ कच्चे माल एवं निर्मित बाँस उत्पादों के लिये बाजार भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

बाँस शिल्पी राजू बंजारा ने बाँस से निर्मित सामग्री फर्नीचर, टेबल सेट कुर्सी, सजावट के सामान आदि का प्रशिक्षण लिया गया। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने वनांचल स्व-सहायता समूह गठित कर बाँस शिल्प की विभिन्न सामग्री का निर्माण शुरू किया। वनांचल स्व-सहायता समूह द्वारा निर्मित उत्पादों को प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों के मेलों में प्रदर्शित किया जाएगा।

राजू बंजारा द्वारा तकरीबन 50 लोगों को बाँस शिल्प कला का प्रशिक्षण दिया। इससे 100 से अधिक परिवारों को रोजगार मिला है। इस प्रकार से यह वन समितियों की आमदनी का एक अच्छा जरिया बन चुका है। स्व-सहायता समूह में बाँस भिर्रे की गुणवत्ता के तहत 50 हजार रुपये प्रति भिर्रा का भुगतान किया जा रहा है।

सामान्य सुविधा केन्द्र में बाँस आधारित आधुनिक मशीन जैसे लेथ मशीन, सेंडर मशीन, नॉट रिमूवल मशीन उपलब्ध हैं। इसके अलावा न्यूमेटिक नेल मशीन, वैक्यूम प्रेशर एण्ड इम्प्रेगनेशर और क्रांस कर मशीनों को निकट भविष्य में खरीदा जाएगा।

सामान्य सुविधा केन्द्र बैहर में बाँस आधारित शिल्प उद्योग में लोगों के लिये अधिक रोजगार के अवसर सृजित होंगे और बाँस उत्पादों की गुणवत्ता से भी बढ़ेगी।

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