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कोरोना जैसी आपात स्थिति में आदेशों का उल्लघंन पड़ेगा मंहगा , होगी कठोर कार्यवाही

पुलिस मुख्यालय, मध्य प्रदेश द्वारा परिपत्र जारी कर  कोरोना वायरस कोविड 19 की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी विभिन्न दिशा निर्देशों आदेशों की अवहेलना करने वाले व्यक्तियों या संस्था के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही के निर्देश दिए हैं।

 

  इस बीच डीआईजी भोपाल श्री इरशाद वली  ने तत्काल रुप से कार्यवाही करते हुए भोपाल जिले के समस्त थाना प्रभारियों को जारी परिपत्र अनुसार अध्ययन कर संबंधित अपराधियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए। अब पुलिस इस परिपत्र के आधार पर मौजूद आपात स्थिति मे कार्यवाही कर पायेगी।

 

    उल्लेखनीय है कि श्री कैलाश मकवाना अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अपराध अनुसंधान विभाग पुलिस मुख्यालय भोपाल ने  पुलिस  उपमहा निरीक्षक भोपाल एवं इंदौर सहित समस्त पुलिस अधीक्षक मध्य प्रदेश एवं समस्त रेल पुलिस अधीक्षक मध्य प्रदेश को दिनांक 7 अप्रैल 2020 को परिपत्र जारी कर नोबेल कोरोना वायरस को कोविड 19 की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी विभिन्न दिशा-निर्देशों आदेशों की अवहेलना करने वाले व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध कार्रवाई करने के संबंध में जारी किया है।

 

    जारी परिपत्र में कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण उत्पन्न हुई  विषम आपदा की स्थिति में सक्षम प्राधिकारियो द्वारा जारी आदेश/ निर्देशों का पालन सभी नागरिकों द्वारा किया जाए यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। साथ ही इन विषम परिस्थितियों में कानून का उल्लंघन करने पर गुण दोष के आधार पर पुलिस /सक्षम प्राधिकारियो को कुछ महत्वपूर्ण विधियों /अधिनियम और धाराओं के तहत दंडनीय अपराधों में कार्यवाही की जाने के निर्देश दिए गए हैं।

   दिए गए परिपत्र में भारतीय दंड विधान की कुछ महत्वपूर्ण धाराएं जिसमें  क्रमशः धारा 188 लोक सेवक द्वारा सम्यक रूप से प्राध्यापक आदेश की अवज्ञा करना ,यह अपराध संज्ञेय और अजमानातीय है। धारा 269 जिसमें उपेक्षा पूर्ण कार्य करना जिससे जीवन के लिए संकट पूर्ण रोग का संक्रमण फैला संभाव्य हो। धारा 270 परिद्वेष पूर्ण कार्य जिससे जीवन के लिए संकट पूर्ण रोग का संक्रमण फैला संभाव्य हो। धारा 271 क्वारंताइन नियमो का पालन ना करना। इसके अलावा अन्य महत्वपूर्ण अधिनियम जिनमे आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7, विदेशी अधिनियम 1946, पासपोर्ट अधिनियम 1967, द रजिस्ट्रेशन ऑफ फौरेन एक्ट, महामारी अधिनियम 1897 की धारा 2/3/4 जहां कोरोनावायरस से संबंधित किसी आदेश का उल्लंघन हो । इसके साथ ही आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 51 से 60 जिसमें धारा 51 में कर्तव्य निर्वहन में बाधा डालना या अधिकारियों के निर्देशों का अनुपालन ना करना, धारा 52 में झूठा क्लेम या दावा करना, धारा 53 में धन् या सामग्री आदि का दुरुपयोग करते हुए कर्तव्यों का उल्लंघन, धारा 54 में अफवाह फैलाना ,धारा 55 में सरकार के विभागों द्वारा अपराध, धारा 56 में आपदा प्रबंधन के लिए कोई कर्तव्य दिया गया है और उस कर्तव्य का निर्वहन नहीं करना, धारा 57 में स्त्रोत, स्थान, वाहन आदि के लिखित आदेश के बाद भी उसे उपलब्ध ना कराना ,धारा 58 में किसी कंपनी द्वारा अपराध किए जाने पर कंपनी /कॉर्पोरेट बॉडी का इंचार्ज का उत्तरदायी होना ,धारा 59 में धारा 55 56 के अपराधों के लिए राज्य सरकार से अभियोजन की स्वीकृति एवं धारा 60 में अपराधों का संज्ञान एवं वाद प्रस्तुतीकरण संबंधी प्रावधानों का जिक्र है।

   इन सब विधानो के साथ ही माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा रिट पिटिशन नंबर 468 /2020 अलख आलोक श्रीवास्तव विरुद्ध यूनियन ऑफ इंडिया में पारित आदेश के माध्यम से कोविड 19 आपातकाल के दौरान मीडिया ,सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से भ्रामक जानकारी का प्रकाशन या प्रसारण करने से रोके जाने एवं माइग्रेंट लेबर के साथ पुलिस द्वारा मानवीय व्यवहार करने के संबंध में जारी आवश्यक निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने संबंधी भी निर्देश दिए गए हैं।

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